श्रोफ आई सेंटर की एंटीरियर सेगमेंट टीम द्वारा मेडिकली रिव्यूड
”अगर मैं बहरी, अंधी होकर भी जीवन को रोचक पाती हूँ, तो आप अपनी पाँचों इंद्रियों का उपयोग करके कितना अधिक अनुभव कर सकते हैं?” – हेलेन केलर
हेलेन के ये शब्द हमें याद दिलाते हैं कि हमें अपनी इंद्रियों के लिए आभारी होना चाहिए, खासकर अपनी आँखों की रोशनी के लिए।

नियमित आँखों की जाँच क्यों महत्वपूर्ण है?
- सही दृष्टि (विजन) आपके रोज़मर्रा के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाती है
- मोतियाबिंद, ग्लूकोमा (काला मोतिया), उम्र से संबंधित मैक्युलर डिजनरेशन और बच्चों में एम्ब्लायोपिया जैसी बीमारियों का समय पर पता चल सकता है
- कमजोर दृष्टि गिरने और दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ा सकती है
सामान्य आँखों की जाँच में क्या होता है?

विजुअल एक्यूटी टेस्ट (दृष्टि परीक्षण)
यह टेस्ट यह जांचता है कि आपकी आँखें एक निश्चित दूरी से कितनी अच्छी तरह पढ़ सकती हैं। इसमें नज़दीक और दूर दोनों तरह की दृष्टि की जांच की जाती है।
चाहे आप चश्मा पहनते हों या नहीं, पूरी आँखों की जाँच करवाना ज़रूरी है। केवल तब इंतज़ार करना जब दृष्टि धुंधली हो जाए, कई बार देर हो सकती है।
इस टेस्ट में:
- मशीन टेस्ट (ऑटो-रेफ्रैक्शन) किया जा सकता है
- अक्षरों और अंकों को पढ़ने वाला पारंपरिक चार्ट टेस्ट किया जाता है
इसमें मरीज से अलग-अलग आकार के अक्षर पढ़ने को कहा जाता है, एक-एक आँख बंद करके और दोनों आँखों से।
इसके आधार पर डॉक्टर अलग-अलग लेंस लगाकर सही नंबर तय करते हैं।
एयर पफ टेस्ट (आँखों का प्रेशर टेस्ट)
इस टेस्ट में आपकी आँखों का दबाव (आई प्रेशर) मापा जाता है। इसमें आँख पर हल्की हवा का झोंका महसूस होता है।
यह टेस्ट खासकर ग्लूकोमा का पता लगाने के लिए जरूरी है, क्योंकि इसमें शुरुआती समय में कोई लक्षण नहीं होते।अगर आपके परिवार में किसी को ग्लूकोमा है, तो नियमित जाँच और भी ज़रूरी हो जाती है। हमारे ऑप्टोमेट्रिस्ट दिल्ली NCR में सामान्य आँखों की जाँच के हिस्से के रूप में यह टेस्ट करते हैं।
आँखों की जाँच के लिए आई सेंटर क्यों जाएँ?

इन शुरुआती टेस्ट के बाद:
- डॉक्टर आपसे आपकी आँखों की समस्या और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में पूछते हैं
- फिर स्लिट लैम्प जांच की जाती है, जिसमें रोशनी की मदद से आँख के आगे के हिस्से (कॉर्निया, कंजंक्टाइवा आदि) को देखा जाता है
- रेटिना की भी एक प्रारंभिक जांच की जाती है
अगर सब सामान्य है या केवल चश्मे की जरूरत है, तो आपको प्रिस्क्रिप्शन दे दिया जाता है।
अगर कोई समस्या पाई जाए तो क्या होता है?
ग्लूकोमा का संदेह होने पर
- आँखों के एंगल की जांच गोनियोस्कोप से की जाती है
- जरूरत पड़ने पर ग्लूकोमा विशेषज्ञ के पास भेजा जाता है
रेटिना की समस्या होने पर
- आँखों को ड्रॉप्स से डाइलेट (फैलाया) किया जाता है
- इसमें 30 मिनट से 1 घंटे या उससे अधिक समय लग सकता है
- इसके बाद रेटिना की पूरी जांच की जाती है
आगे की जांच (यदि जरूरत हो)
सही डायग्नोसिस के लिए डॉक्टर कुछ एडवांस टेस्ट भी सलाह दे सकते हैं, जैसे:
- OCT (ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी)
- OCT-Angio
- VFA (विजुअल फील्ड एनालिसिस)
ये सभी जांचें एक ही जगह उपलब्ध होती हैं।
याद रखें
साल में एक बार आँखों के डॉक्टर को 1–2 घंटे देना आपकी आँखों की रोशनी बचा सकता है।
रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर होती है।
आज ही अपनी आँखों की जाँच के लिए अपॉइंटमेंट बुक करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: आँखों की जाँच कितने समय में करानी चाहिए?
सामान्यतः साल में एक बार आँखों की जाँच करानी चाहिए। अगर आपको चश्मा है, डायबिटीज है या परिवार में आँखों की बीमारी का इतिहास है, तो डॉक्टर की सलाह अनुसार जाँच की आवृत्ति बढ़ सकती है।
Q2: eye checkup में कौन-कौन से टेस्ट होते हैं?
एक सामान्य eye checkup में विजुअल एक्यूटी टेस्ट, नंबर चेक (refraction), आई प्रेशर टेस्ट (air puff test), स्लिट लैम्प जांच और रेटिना की जांच शामिल होती है। जरूरत होने पर OCT या अन्य एडवांस टेस्ट भी किए जाते हैं।
Q3: बच्चों के लिए eye checkup कब जरूरी होता है?
बच्चों की पहली आँखों की जाँच 3–5 साल की उम्र में करानी चाहिए। अगर बच्चा टीवी के पास बैठता है, आँखें मिचमिचाता है या पढ़ाई में ध्यान नहीं दे पाता, तो तुरंत जाँच करानी चाहिए।
Q4: क्या चश्मा होने पर भी regular eye checkup जरूरी है?
हाँ, अगर आप चश्मा पहनते हैं तो नियमित जाँच और भी जरूरी है। इससे आपके नंबर में बदलाव और आँखों की अन्य समस्याओं का पता समय पर चल सकता है।
Q5: ग्लूकोमा का पता कैसे चलता है?
ग्लूकोमा का पता आई प्रेशर टेस्ट, optic nerve जांच और visual field test से चलता है। यह बीमारी अक्सर बिना लक्षण के होती है, इसलिए नियमित जाँच बहुत जरूरी है।
Q6: क्या आँखों की जाँच से मोतियाबिंद का पता चलता है?
हाँ, नियमित आँखों की जाँच में मोतियाबिंद का शुरुआती और एडवांस स्टेज में पता लगाया जा सकता है, जिससे समय पर इलाज संभव होता है।





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