डॉ. वरषिणी शंकर, MS द्वारा मेडिकल रिव्यू | श्रोफ आई सेंटर
ब्लू लाइट दिखाई देने वाली रोशनी (visible light) का एक हिस्सा है। इसका सबसे बड़ा स्रोत सूरज है, जबकि थोड़ी मात्रा में यह LED बल्ब, मोबाइल और लैपटॉप स्क्रीन से भी आती है।
ज्यादा स्क्रीन टाइम आँखों के लिए समस्या जरूर बन सकता है। लेकिन यह कहना कि मोबाइल की ब्लू लाइट आपकी आँखों को धीरे-धीरे खराब कर रही है — इस बात के लिए मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।
आइए समझते हैं कि वास्तव में क्या सच है और क्या सिर्फ एक आम धारणा।
ब्लू लाइट क्या होती है?
ब्लू लाइट इंद्रधनुष के रंगों (VIBGYOR) में से एक रंग है। यह प्रकृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसका मुख्य स्रोत सूरज की रोशनी है।
अन्य स्रोत:
- टीवी
- LED और फ्लोरोसेंट बल्ब
- मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप
ज्यादा एक्सपोजर से कुछ समस्याएं हो सकती हैं, जैसे:
- धुंधला दिखना
- आँखों में थकान
- मैक्युलर डिजेनरेशन
- मोतियाबिंद
लेकिन इसमें एक जरूरी बात समझनी चाहिए — आगे पढ़ें।

ब्लू लाइट आँखों को कैसे नुकसान पहुंचाती है?
1. आँखों में थकान और ड्राई आई
यहां असली कारण स्क्रीन टाइम है।
जितना ज्यादा आप स्क्रीन को देखते हैं:
- उतना कम आप पलक झपकाते हैं
- आँखों की नमी कम हो जाती है
इससे ड्राई आई और आँखों में जलन होती है। यह समस्या ब्लू लाइट से ज्यादा स्क्रीन देखने की आदत से जुड़ी है।
2. मैक्युलर डिजेनरेशन
बहुत ज्यादा ब्लू लाइट रेटिना की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है।
लेकिन ध्यान रखने वाली बात:
इस पर जो रिसर्च है, वह मुख्य रूप से सूरज की रोशनी पर आधारित है| स्क्रीन से आने वाली ब्लू लाइट का प्रभाव अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है
3. मोतियाबिंद के बाद
यदि आपको मोतियाबिंद है या आप मोतियाबिंद सर्जरी करवाने वाले हैं, तो अपने सर्जन से उस IOL के प्रकार के बारे में पूछें जो आपके धुंधले प्राकृतिक लेंस को बदलने के लिए उपयोग किया जाएगा।
क्या हर ब्लू लाइट नुकसानदायक होती है?

नहीं। ब्लू लाइट हमेशा खराब नहीं होती।
- इसका उपयोग लाइट थेरेपी में भी होता है
- दिन में यह आपके शरीर की नींद-जागने की प्रक्रिया (circadian rhythm) को संतुलित रखने में मदद करती है लेकिन रात में ज्यादा ब्लू लाइट लेने से नींद खराब हो सकती है|
क्या ब्लू लाइट फिल्टर सच में मदद करते हैं?
सिर्फ ब्लू लाइट फिल्टर इस्तेमाल करने से समस्या हल नहीं होती।
अगर आप:
- बहुत ज्यादा स्क्रीन देखते हैं
- ब्रेक नहीं लेते
तो सिर्फ फिल्टर लगाने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।
ब्लू लाइट ग्लासेस के बारे में सच्चाई
आजकल ब्लू लाइट फिल्टर वाले चश्मे काफी पॉपुलर हैं, लेकिन:
स्क्रीन से होने वाली आँखों की थकान कम करने में इनके फायदे का मजबूत प्रमाण नहीं है
अगर आप ज्यादा बाहर रहते हैं:
अच्छे UV प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस ज्यादा जरूरी हैं
क्योंकि:
- सूरज की रोशनी से मोतियाबिंद (cataract) और Age-related Macular Degeneration ( AMD) का खतरा बढ़ता है
आपको क्या करना चाहिए?
- सोने से 1 घंटे पहले स्क्रीन कम करें
- 20-20-20 नियम अपनाएं
- हर 20 मिनट में, 20 फीट दूर देखें, 20 सेकंड के लिए
- बाहर जाते समय अच्छे सनग्लासेस पहनें
- अगर आँखों में लगातार जलन, सूखापन, धुंधलापनहो रहा है, तो डॉक्टर को दिखाएं
श्रोफ आई सेंटर में हम रोज ऐसे मरीज देखते हैं जिन्हें स्क्रीन के कारण ड्राई आई और आँखों में तनाव की समस्या होती है। सही जांच से असली कारण समझ आता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q: क्या स्क्रीन की ब्लू लाइट आँखों को नुकसान पहुंचाती है?
नहीं, ऐसा कोई पक्का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ज्यादातर नुकसान सूरज की रोशनी से होता है। स्क्रीन ज्यादा देखने से आँखों में थकान और ड्राई आई होती है।
Q: क्या ब्लू लाइट चश्मा सच में काम करता है?
ज्यादातर मामलों में नहीं। आँखों की थकान कम करने के लिए स्क्रीन टाइम कम करना ज्यादा असरदार है।
Q: क्या सूरज की रोशनी स्क्रीन से ज्यादा नुकसानदायक है?
हां, सूरज की रोशनी में ब्लू लाइट ज्यादा होती है और यह ज्यादा नुकसान कर सकती है।
Q: क्या ब्लू लाइट नींद को प्रभावित करती है?
हां, खासकर रात में स्क्रीन देखने से नींद आने में दिक्कत हो सकती है।
Q: कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
अगर स्क्रीन कम करने के बाद भी आँखों में दर्द, सूखापन, धुंधलापन ठीक नहीं हो रहा, तो आँखों की जांच करवानी चाहिए।





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