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नियमित आँखों की जाँच से किन समस्याओं से बचा जा सकता है?

नियमित आँखों की जाँच से किन समस्याओं से बचा जा सकता है?

नियमित आँखों की जाँच से किन समस्याओं से बचा जा सकता है?

डॉ. अपूर्वा अग्रवाल, MS, द्वारा मेडिकली रिव्यूड | रिफ्रैक्टिव स्पेशलिस्ट | श्रोफ आई सेंटर

 

नियमित आँखों की जाँच से ग्लूकोमा (काला मोतिया), मायोपिया (नज़दीक की कमज़ोर नज़र), डायबिटिक रेटिनोपैथी और हाई ब्लड प्रेशर जैसी कई समस्याओं का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है, अक्सर तब भी जब कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। एक योग्य नेत्र विशेषज्ञ द्वारा साल में कम से कम एक बार व्यापक (Comprehensive) आँखों की जाँच करवाना आपकी दृष्टि और संपूर्ण स्वास्थ्य की सुरक्षा का सबसे प्रभावी तरीका है।

आँखों को अक्सर हमारे शरीर का ऐसा अंग माना जाता है जो हमारी सेहत के बारे में बहुत कुछ बता सकता है। इसलिए आँखों की जाँच केवल साफ़ दिखाई देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान करने में भी मदद करती है।

 

बढ़ती मायोपिया (नज़दीक की कमज़ोर नज़र) को समय पर पहचानें

आज के समय में बच्चों और युवाओं में मायोपिया (नज़दीक की कमज़ोर नज़र) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण बढ़ता स्क्रीन टाइम भी है।

यदि कम उम्र में ही सही दृष्टि की समस्या का पता चल जाए और उसका इलाज शुरू कर दिया जाए, तो बच्चे की पढ़ाई, सीखने की क्षमता और दैनिक गतिविधियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

यदि बचपन में मायोपिया का इलाज न कराया जाए, तो समय के साथ नज़र और अधिक कमज़ोर हो सकती है।

इसीलिए बच्चों की आँखों की जाँच हर छह महीने में करवाना उचित माना जाता है, विशेषकर यदि परिवार में किसी को मायोपिया या अन्य आँखों की बीमारी रही हो। इससे भविष्य में आँखों से जुड़ी कई समस्याओं का जोखिम कम किया जा सकता है।

अपने नज़दीकी नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लें और आज ही अपनी आँखों की जाँच के लिए अपॉइंटमेंट बुक करें।

 

केवल विज़न स्क्रीनिंग पर्याप्त नहीं होती

स्कूल में होने वाली विज़न स्क्रीनिंग या ड्राइविंग लाइसेंस के लिए की जाने वाली आँखों की जाँच यह साबित नहीं करती कि आपकी आँखें पूरी तरह स्वस्थ हैं।

ये स्क्रीनिंग केवल कुछ सामान्य दृष्टि संबंधी समस्याओं की पहचान कर सकती हैं, जैसे दूर का बोर्ड पढ़ना या सड़क के संकेत स्पष्ट दिखाई देना।

लेकिन केवल एक व्यापक (Comprehensive) आँखों की जाँच ही यह सुनिश्चित कर सकती है कि आपकी दृष्टि पूरी तरह स्पष्ट है और आपको ग्लूकोमा, रेटिना की बीमारी या आँखों के कैंसर जैसी गंभीर समस्याएँ तो नहीं हैं, जिनके शुरुआती चरण में अक्सर कोई लक्षण नहीं होते।

 

आँखों की बीमारियों का समय पर पता लगाना क्यों ज़रूरी है?

ग्लूकोमा (काला मोतिया) ऐसी बीमारी है जिसे अक्सर “Silent Thief of Sight” कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरण में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते।

जो लोग नियमित आँखों की जाँच नहीं करवाते, उन्हें अक्सर इस बीमारी का पता तब चलता है जब उनकी दृष्टि स्थायी रूप से प्रभावित हो चुकी होती है।

एक बार दृष्टि का नुकसान हो जाने पर उसे वापस लाना संभव नहीं होता। इसलिए नियमित जाँच के माध्यम से आँखों का दबाव (Eye Pressure) और अन्य जोखिम कारकों की समय पर पहचान करना बहुत ज़रूरी है।

याद रखें, सामान्य विज़न स्क्रीनिंग से ग्लूकोमा का पता नहीं चलता।

 

क्या आप जानते हैं कि नियमित आँखों की जाँच से कई गंभीर बीमारियों का भी पता चल सकता है?

नियमित आँखों की जाँच के दौरान डॉक्टर आपकी रेटिना की रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) की स्थिति देखते हैं।

इनकी मदद से कई स्वास्थ्य समस्याओं का शुरुआती संकेत मिल सकता है, जैसे:

  • डायबिटीज
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • हाई कोलेस्ट्रॉल

इन बीमारियों के शुरुआती बदलाव रेटिना में दिखाई दे सकते हैं, कई बार तब भी जब शरीर में कोई अन्य लक्षण न हों।

यदि आपको डायबिटीज है या परिवार में इसका इतिहास है, तो हर वर्ष आँखों की जाँच करवाना और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

भविष्य में अल्ज़ाइमर रोग के जोखिम का पता लगाने के लिए भी आँखों की जाँच का उपयोग किए जाने पर शोध जारी है।

 

आँखों की जाँच के लिए श्रोफ आई सेंटर क्यों चुनें?

श्रोफ आई सेंटर में दिल्ली NCR के सभी केंद्रों – कैलाश कॉलोनी, कनॉट प्लेस, गुरुग्राम और गाज़ियाबाद – पर अनुभवी नेत्र विशेषज्ञ व्यापक आँखों की जाँच करते हैं।

1914 से विश्वसनीय और NABH मान्यता प्राप्त श्रोफ आई सेंटर में एक ही विज़िट के दौरान निम्नलिखित जाँच की जाती हैं:

  • विजुअल एक्यूटी (दृष्टि) की जाँच
  • रेटिना की जाँच
  • ग्लूकोमा की स्क्रीनिंग के लिए आँखों के दबाव (Intraocular Pressure) की जाँच
  • कॉर्निया की जाँच

हमारे यहाँ समय पर बीमारी की पहचान के माध्यम से हज़ारों मरीज अपनी दृष्टि सुरक्षित रखने और कई स्वास्थ्य समस्याओं का शुरुआती इलाज कराने में सफल हुए हैं।

 

आज ही अपनी आँखों की जाँच कराएँ

यदि आपको धुंधला दिखाई दे रहा है या आपकी पिछली आँखों की जाँच को काफी समय हो गया है, तो अपने नज़दीकी श्रोफ आई सेंटर में अपॉइंटमेंट बुक करें।

दिल्ली NCR में व्यापक आँखों की जाँच के लिए आज ही कॉल करें:

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कैलाश कॉलोनी | कनॉट प्लेस | गुरुग्राम | गाज़ियाबाद

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q: आँखों की जाँच कितनी बार करानी चाहिए?

वयस्कों को साल में कम से कम एक बार व्यापक आँखों की जाँच करानी चाहिए। बच्चों के लिए हर छह महीने में जाँच करवाना बेहतर माना जाता है, विशेषकर यदि परिवार में मायोपिया या अन्य आँखों की बीमारियों का इतिहास हो।

Q: क्या आँखों की जाँच से डायबिटीज का पता चल सकता है?

हाँ। आँखों की जाँच के दौरान डॉक्टर रेटिना की रक्त वाहिकाओं की जाँच करते हैं। इनमें होने वाले बदलाव डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

Q: क्या नियमित आँखों की जाँच से ग्लूकोमा का पता चलता है?

हाँ। ग्लूकोमा के शुरुआती चरण में अक्सर कोई लक्षण नहीं होते। नियमित आँखों की जाँच के दौरान आँखों का दबाव और ऑप्टिक नर्व की जाँच करके इस बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सकता है।

Q: बच्चों की पहली आँखों की जाँच कब करानी चाहिए?

बच्चों की पहली व्यापक आँखों की जाँच लगभग 3 वर्ष की उम्र में करानी चाहिए। इसके बाद स्कूल शुरू होने पर हर साल नियमित जाँच करानी चाहिए। यदि मायोपिया जैसी कोई समस्या मिले, तो समय पर इलाज से बच्चे की पढ़ाई और विकास पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सकता है।

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